Student’s Speak

मेरी सफलता में इतिहास की भूमिका सबसे ज्यादा रही। इतिहास पढ़ाने में रजनीश सर का कोई विकल्प नहीं। इनका गहन अध्ययन, सूक्ष्म विश्लेषण और उत्तर लेखन की वैज्ञानिक शैली अनुपम है। मैं अपनी सफलता में इनके योगदान के लिए आभार व्यक्त करती हूँ।

किरण कौशल

रैंक-3, UPSC

रजनीश सर के अध्यापन की विशिष्ट शैली ने मेरे इतिहास की समझ एवं उत्तर लेखन में एक मौलिक परिवर्तन लाने में उल्लेखनीय योगदान दिया। मैं अपने उत्कृष्ट रैंक के लिए सर का हृदय से धन्यवाद करता हूँ।

गौरव कुमार

रैंक-31, UPSC

सर की सरल, सुबोध् एवं मौलिक शैली ने मुझे महसूस करवाया कि इतिहास रटने का नहीं बल्कि समझ का विषय है। स्वयं इतिहास का अध्यापक होने के बावजूद सर के निरंतर मार्गदर्शन ने ही मेरे सपने को साकार किया।
बहुत-बहुत धन्यवार सर।

अमित सिंह

IPS

मेरे चयन में इतिहास में पाये गये अंक निर्णायक रहे। इसका श्रेय में रजनीश सर के मार्गदर्शन में किये गये अपने मेहनत को देना चाहूँगा। सर के द्वारा इतिहास पढ़ाने का सटीक तरीका और इनके द्वारा कराया जाने वाला उत्तर लेखन का अभ्यास अद्वितीय है।

मिथिलेश मिश्रा

रैंक-46, UPSC

रजनीश सर के अध्यापन की विशिष्ट शैली ने मेरे इतिहास की समझ एवं उत्तर लेखन में एक मौलिक परिवर्तन लाने में उल्लेखनीय योगदान दिया। मैं अपने उत्कृष्ट रैंक के लिए सर का हृदय से धन्यवाद करता हूँ।

अभिषेक कुमार

रैंक-48, UPSC

रजनीश सर के पास इतिहास पढ़ाने की एक मौलिक एवं विशिष्ट शैली है, जिसे मैनें कक्षा के दौरान महसूस किया। सर से कक्षा लेने के बाद मुझे लगा कि इतिहास एक सहज, सरल एवं अंकदायी विषय है और इसकी तैयारी हेतु सिहांता का चयन मेरे लिए परिणाम देने वाला सिद्ध हुआ।

अतुल शर्मा

रैंक-99, UPSC

परीक्षा के स्वरूप में इतिहास की बढ़ती भूमिका को देखते हुए मैनें इस विषय का चयन किया और तैयारी हेतु सिहांता आईएएस में प्रवेश का निर्णय भी निर्णायक रहा। मैनें रजनीश सर की कक्षाओं से और उनके द्वारा संरचनात्मक विकास पर दिये गये बल से खुद को इतिहास में बहुत सहज कर लिया था।

रीना निरंजन

रैंक-211, UPSC

इतिहास विषय की सटीक तैयारी के लिए मेरा सिहांता में प्रवेश लेना सर्वश्रेष्ठ निर्णय सिद्ध हुआ। मैंने रजनीश राज सर की कक्षा में यह जाना कि उत्तर को कैसे मौलिक तरीके से बेहतर बना के लिखा जा सकता है। इनहीं सब का नतीजा मेरी सफलता के रूप में निकला।

यज्ञेश कुमार

रैंक-278, UPSC

इतिहास विषय का चयन और रजनीश सर का मार्गदर्शन मेरी सफलता के दो स्तंभ रहे। विषय की स्पष्ट समझ विकसित करने की कला सर की विशेषता है। उत्तर लेखन में सर का अमूल्य योगदान रहा। कक्षा में पढ़ी गई बातें और उत्तर लेखन हेतु किया गया अभ्यास मेरी सफलता को सुनिश्चित करने में सहायक रहा। मैं अपनी सफलता का श्रेय रजनीश सर को देना चाहूँगा।

अखिलेश्वर सिंह

रैंक-344, UPSC

मेरी सफलता मोटे तौर पर इतिहास के उच्च अंक का ही परिणाम है, जिसमें 378 अंक पाने के लिए रजनीश सर के अध्यापन और लेखन एवं अन्य सभी स्तर के सहयोगों के प्रति आभारी हूँ। यदि भूगोल में औसर अंक भी आता तो मैं प्रथम 50 रैंक के अन्दर होता।

विष्णु कान्त तिवारी

अंक-378, UPSC

मेरे चयन में इतिहास में पाये गये 376 अंक निर्णायक रहे। इसका पूरा श्रेय मैं रजनीश सर और उनके मार्गदर्शन में अपनी मेहनत को देना चाहूँगा। सर के द्वारा इतिहास को पढ़ाने का सटीक तरीका और विशेषकर कक्षा में उनके द्वारा प्रश्नों के उत्तर प्रारूप बनाने का जो अभ्यास है वो मेरे लिए सर्वाधिक लाभदायी रहा।

नरेश सैनी

अंक-376 , UPSC

इतिहास विषय की सटीक तैयारी के लिए मेरा सिहांता में प्रवेश लेना सर्वश्रेष्ठ निर्णय सिद्ध हुआ। मैंने रजनीश राज सर की कक्षा में यह जाना कि उत्तर को कैसे मौलिक तरीके से बेहतर बना के लिखा जा सकता है। इन्हीं सब का नतीजा मेरी सफलता के रूप में निकला।

मयंक प्रभा तोमर

अंक 371, UPSC

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